• 07 Mar, 2026

गाय की तस्करी पर सरकार सख्त, 7 साल की सजा , 50 हजार जुर्माना

गाय की तस्करी पर सरकार सख्त, 7 साल की सजा , 50 हजार जुर्माना

● अपराध को संज्ञेय और गैरजमानती बनाया गया, रोकथाम और आरोपियों पर कार्रवाई को लेकर कड़े आदेश ● पुलिस महानिदेशक ने जारी किया तीन पृष्ठों का परिपत्र

रायपुर। राज्य में भाजपा  की सरकार अब गोवंश व दुधारू पशुओं की तस्करी , वध और मांस बिक्री तो सेकर सख्त हो गई है। पिछले दिनों आरंग में हुई लिंचिंग की घटना के बाद सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। डीजीपी अशोक जुनेजा ने मंगलवार 16 जुलाई को इस आशय का तीन पेज का परिपत्र भी जारी किया है। गौ वंश की तस्करी और अवैध परिवहन पर सात साल तक सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 
            
                अपराध को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया है। इसमें अभियुक्त को ही सिध्द करना होगा कि तस्करी नहीं हो रही है। सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना गौ-वंश का परिवहन नहीं किया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत अब परिवहन के दौरान वाहन पर फ्लेक्स भी लगाना होगा। तस्करी पाये जाने पर वाहन राजसात किया जा सकेगा और वाहन मालिक पर भी कार्रवाई होगी।  इतना ही नहीं इससे अर्जित संपत्ति को चिह्नित कर कु्र्क किया जाएगा।

       इसके अलावा राजपत्रित अधिकारी को उक्त किस्म की घटनाओं की रोकथाम और पर्यवेक्षण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। पुलिस के अधिकारियों का शिथिल या संलिप्त होना पाये जाने पर उन पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। राजपत्रित अधिकारी सूचना एकत्र करेंगे ,जिले के सभी प्रकार से अध्ययन करेंगे और इसके साथ ही सभी आरोपियों की समीक्षा व सतत निगरानी आवश्यक रूप से करनी होगी। 

छत्तीसगढ़ में अब गौ-वंश की तस्करी संभव नही :  डीप्टी सीएम शर्मा

गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि गोवंश व दुधारू पशुओं की अनाधिकृत परिवहन ( तस्करी) , वध या मांस की बिक्री आदि घटनाओं की रोकथाम तथा संलिप्त आरोपियों के विरुध्द प्रभावी कार्रवाई करने के संबंध में आदेश जारी किया गया है।  भाजपा सरकार गौ-वंश के अवैध परिवहन या तस्करी के मामले में सख्ती से निबट रही है। हमने सजा और जुर्माने का इंतजाम करके यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि कोई भी इसका उलंधन न करने पाए। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। छत्तीसगढ़ में अब गौ -तस्करी संभव नहीं है। इसके लिए हमने प्रत्येक स्तर पर निगरानी तय कर दी है। 

ये नियम अधिनियम होंगे प्रभावशील

  • छग कृषक पशु परिरक्षण (संशोधन) अधिनियम- 2011
  • छग कृषक पशु परिरक्षण नियम 2014
  • पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम( 1960)
  • पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण नियम ( 2017 ) 

नियम विरुध्द परिवहन पर एसपी, थाना प्रभारी जिम्मेदार

उक्त परिपत्र के मुताबिक यदि नियम विरुध्द परिवहन होना पाया जाता है तो जहां से परिवहन शुरू हुआ और जहां वाहन जब्त किया गया है उस बीच के समस्त पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारियों के सर्विस बुक में नकारात्मक टिप्पणी अंकित की जाएगी। इसके बाद इसी तरह पांच से अधिक बार नकारात्मक टिप्पणी अंकित होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। यदि किसी पुलिस अधिकारी -कर्मचारी की गौ-वंश के वध, या गौ-वंश व दुधारू पशुओं की तस्करी ( अवैध परिवहन) की कार्रवाई में किसी प्रकार की शिथिलता  या उनकी लिप्तता पायी जाती है तो उनके विरुध्द कठोर दंडात्मक  और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।