• 07 Mar, 2026

फोर्स पहली बार गवाड़ी पहाड़ पर चढ़ी, फिर साजिश रच रहे नक्सलियों को मार गिराया

फोर्स पहली बार गवाड़ी पहाड़ पर चढ़ी, फिर साजिश रच रहे नक्सलियों को मार गिराया

■ बंधन नहीं , नक्सली जहां मिलें वहां मारें - सुंदरराज

दंतेवाड़ा।   केन्द्र सरकार के नक्सलियों के सफाये के संकल्प के बाद बस्तर में अलग किस्म की दहशत तारी है। अबूझमाड़ में नक्सलियों के खिलाफ करीब 1000 जवानों का ऑपरेशन शनिवार 5 अक्टूबर की शाम खत्म हुआ। इनमें से सिर्फ एक ही जवान घायल है बाकी के सभी जवान सुरक्षित दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय पहुंच गए हैं।  जवान अपने साथ मारे गए 31 नक्सलियों के शवों के साथ मौके से मिले एक  एलएमजी, 4 एके -47, 6 एसएलआर, 3 इंसास राइफल्स समेत कई अन्य हथियार भी लेकर आए हैं।

   दावा किया गया है कि इस बड़ी भुठभेड़ में 18 पुरुष नक्सलियों और 13 महिला नक्सलियों को जवानों ने मार गिराया। मारे गए 16 नक्सलियों पर करीब एक करोड़ 30  लाख रुपये का  ईनाम घोषित है। जानकारी है कि शुक्रवार रात तक अफसरों ने 36 नक्सलियोंं के मारे जाने की सूचना दी थी, लेकिन अगले दिन केवल 31 शव ही बरामद किये जा सके।

   इस बड़े ऑपरेशन के बाद आईजी सुंदरराज पी, दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय और नारायणपुर एसपी प्रभात कुमार ने ऑपरेशन से संबंधित जानकारी मीडिया से साझा की और कहा कि यह ऑपरेशन उम्मीद के मुताबिक सफल रहा।

    बस्तर आईजी सुंदरराज ने कहा कि पुलिस और जवानों के लिए अब सीमा का बंधन नहीं है, जिस भी जिले की पुलिस को जहां भी नक्सलियोंं की मौजूदगी की सूचना मिलती है वो वहां घुस कर नक्सलियों को मारें। अब जवानों के सीमा बंधन नहीं है। उन्होंने कहा कि अब जहां भी नक्सली जमा होंगे वहां घुसकर मारेंगे। 
 

चार दिन में बनाई गई पूरी योजना, टारगेट था मिलिट्री नक्सल कमांडर कमलेश…  

रायपुर।  दंतेवाड़ा में इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों को मारन के पीछे अगस्त में हुई केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की बैठक वजह बताई जा रही है। मंत्री शाह ने नक्सलियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई के निर्देश दिये थे। उन्होंने कुछ बिन्दुओं पर काम करने कहा था उसी के अनुसार ही योजना बनाई गई। इसमें बड़ी ओर पूरी भूमिका प्रदेश और केन्द्र के इंटेलिजेंस की थी। उन्हें एक अक्टूबर को पक्की सूचना मिली कि नार्थ बस्तर का कमांडर और मिलिट्री दस्ते का प्रभारी कमलेश उर्फ आरके मौजूद  है। इस इनपुट की कई स्तरों पर जांच की गई।

  पहाड़ पर बड़े नक्सलियों के मौजूद होने की पुख्ता जानकारी होने के बाद डीजीपी अशोक जुनेजा, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, आईजी सुंदरराज पी, ने पैरामिलिटरी फोर्स के अधिकारियोंं से इस बारे में बातचीत कर एक सफल होने की नीति पर काम किया।

   नक्सल ऑपरेशन में यह बदलाव–

नक्सल ऑपरेशन के तौर तरीकों में बड़ा बदलाव किया गया है। हर जिले में इसके लिए डीएसपी रैंक के अधिकारियों की पोस्टिंग की गई है जो इंटेलिजेंस का काम देखते हैं। पीएचक्यू में हाईटैक निगरानी तकनीकी टीम बिठाई गई है। साथ ही जंगल के भीतर से आने वाली हर सूचना कई स्तर पर जांची जा रही है। इसके बाद ही किसी तरह का ऑपरेशन प्लान किया जाता है। यह ऑपरेशन का नया नॉर्म है। 

केन्द्र को भेजी जा रही रिपोर्ट

हर माह पुलिस, एनआईए, आईबी, एमआईबी और पैरामिलिट्री की संयुक्त मीटिंग होती है, ताकि समन्वय बना रहे। हर बैठक में ऑपरेशन को लेकर प्लानिंग की जाती है। इसकी रिपोर्ट अब केन्द्रीय मंत्रालय को जाती है। केन्द्रीय गृह सचिव और आईबी चीफ नक्सल ऑपरेशन को लेकर बैठकें और चर्चा कर रहे हैं।