नीति की सराहना, आक्रामक नीति से बैकफुट पर जा रहे नक्सली…
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■ स्काईवॉक में अंबेडकर व डीकेएस अस्पताल के सामने रहेगी लिफ्ट …
रायपुर। प्रदेश की राजधानी रायपुर में पिछले सात साल से अधूरे और उपेक्षित पड़े स्काईवॉक को पूरा करने का नया टेंडर जारी कर दिया गया है। इससे पहले की कांग्रेस सरकार ने इस पर पांच साल में इस अधूरी पड़ी परियोजना को पूरा करने के लिए सिवा सुझाव मंगवाने के कोई ठोस काम नहीं किया। अब ठेका लेने वाली कंपनी को 8 महीने के भीतर 31 करोड़ रुपये में इस अधूरे काम को पूरा करना होगा। इसके अलावा इसमें दो जगहों पर अलग से सीढ़ियां भी बनाई जाएंगी।
डीकेएस परिसर और अंबेडकर अस्पताल के गेट के पास लिफ्ट लगाई जाएगी ताकि मरीजों को एक अस्पतास से दूसरे अस्पताल में सीधे पहुंचाया जा सके। गंभीर मरीजों को भी लाने लेजाने के लिए इस स्काईवॉक का उपयोग किया जाएगा। अंबेडकर अस्पताल से रोज औसतन 20 से ज्यादा मरीज डीकेएस लाए जाते हैं। इसके पूरा हो जाने से ट्रैफिक में फंसे बिना ही मरीजों को सीधे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना आसान हो जाएगा।
शासन की मंजूरी के बाद अधूरे पड़े स्काईवॉक को पूरा करने की कवायद शुरू हो गई है। अब लोकनिर्माण विभाग को इसे बनाने के लिए एक महीने के भीतर नई एजेंसी तय करनी है। ठेके की शर्तों के मुताबिक एक साल के भीतर ही स्काईलवॉका का काम पूरा करना होगा। इसे अब मरीजों की सहूलियत के हिसाब से तैयार किया जाएगा।
जाम में नहीं फंसेंगे मरीज-
अंबेडकर अस्पताल के मरीज जरूरत पड़ने पर बिना ट्रैफिक में फंसे सीधे स्काईवॉक के जरिये सीधे डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल पहुंच सकेंगे। इसके लिए इन दोनो अस्पतालों को इस स्काईवॉक से जोड़ने वाली जगहों पर दो लिफ्ट लगाई जाएगी। अभी मौजूदा ढांचे में स्काईवॉक का एक हिस्सा डीकेएस अस्पताल परिसर में उतरता है। इसी हिस्से में सीढ़ी और एस्केलेटर के पास लिफ्ट लगाई जाएगी। इसी तरह अंबेडकर अस्पताल के गेट के पास भी एक हिस्सा लिफ्ट के लिए उतारा जाएगा। यहां भी सीढ़ी और स्केलेटर के अलावा लिफ्ट रहेगी। इसी की मदद से मरीजों को लाया ले जाया जा सकेगा।
शास्त्री चौक पर बनेगी रोटरी
स्काईवॉक में शास्त्री चौक वाले हिस्से में रोटरी बनेगी। पूरे चौक पर किसी भी हिस्से पर लोग चढ़ उतर सकेंगे। कई हिस्से में गर्डर तक काम हो चुका है। उसके ऊपर फ्लोरिंंग कर आरसीसी स्लैब ढाला जाएगा। स्लैब के ऊपर टाइल और दोनो किनारों पर स्टील की रैलिंग लगाई जाएगी। बारिश और धूप से बचने के इसके ऊपरी हिस्से में पोलीकार्बोनेट की शीट्स लगाई जाएगी। स्काईवॉक से आसपास सरकारी दफ्तरों में आने जाने वालों को राहत मिलेगी। सात साल पहले कराए गए एक सर्वे में यह बताया गया था कि शास्त्री चौक के चारों ओर रोज औसतन 40 हजार से ज्याादा लोग पैदल सफर करते हैं।
अधूरा काम करने वाली एजेंसी बुलावे पर भी नहीं आई
भाजपा की सरकार ने तब 2016-17 में स्काईवॉक बनाने का निर्णय लिया था। लखनऊ की जीएस कंस्ट्रक्शन कंपनी को 46 करोड़ में इसे बनाने का ठेका दिया गया था। कुछ दिनों बाद इसके ले आउट में बदलाव किया गया। इसे लागत 77 करोड़ पहुंच गई। फिर बाद में पांच महीने काम बंद रहा। इसके बाद ठेका लेने वाली मूल कंपनी ने गुजरात की श्री जी कृपा कंपनी को पेटी पर काम दे दिया यानी उसने अपनी ओर से यह काम उस कंपनी को ठेके में दे दिया। इसी दौरान प्रदेश में सरकार बदल गई और कांग्रेस सरकार ने इस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर कर काम रुकवा दिया। अब भाजपा की सरकार दोबारा आई तो उसने फिर से काम शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए ठेका कंपनी को 30 अगस्त और पांच सितंबर को बुलवाया भी था पर कंपनी के जिम्मेदार नहीं पहुंचे इसलिए नये सिरे से टेंडर जारी किया गया है।
इस जगहों पर लगेंगे 12 एस्केलेटर्स
इस सभी स्थानों पर एस्केलटर के साथ सीढ़ियां भी रहेंगी।
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■ बंधन नहीं , नक्सली जहां मिलें वहां मारें - सुंदरराज
■ छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन का किया उद्घाटन, ■ पर्यावरणीय संकट से निबटने में समान रूप से सहभागिता ■ छत्तीसगढ़ ने पूरा किया 4 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य ■ जलवायु परिवर्तन से निबटने छग में हो रहा बेहतर काम
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