• 07 Mar, 2026

भूपेश की उप सचिव सौम्या चौरसिया को अंतरिम जमानत, पर अभी रिहाई नहीं …

भूपेश की उप सचिव सौम्या चौरसिया को अंतरिम जमानत, पर अभी रिहाई नहीं …

■ सुप्रीम कोर्ट ने पूछा ईडी आरोपी को कितने समय तक हिरासत में रख सकती है ■ सात 7 साल की अधिकतम सजा, बिना आरोप तय हुए 2 साल से जेल में- कोर्ट ■ कोयला घोटाले में सौम्या को गिरफ्तार किया था ईडी ने ■ आय से अधिक संपत्ति मामले में अभी जेल में ही रहेंगी सौम्या चौरसिया

रायपुर।  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 25 सितंबर को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को अंतरिम जमानत दे दी है जो कथित कोयला लेवी घोटाले  से जुड़े मनी लांड्रिंग ( धन शोधन) मामले में आरोपी हैं। अंतरिम जमानत के बाद भी हालांकि सौम्या चौरसिया जेल में ही रहेंगी।

    कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी ईओडब्ल्यू आर्थिक अपराध शाखा द्वारा आय से अधिक संपत्ति मामले में दर्ज अपराध की वजह से सौम्या चौरसिया को अभी जेल में ही रहना होगा क्यों कि इस मामले में उन्हें अभी राहत नहीं मिली है। इससे पहले आईएएस रानू साहू को भी सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत फिर पूर्ण जमानत दी थी। पीठ ने तो ईडी से पूछा कि ईडी आरोपी को कितने समय तक हिरासत में रख सकती है, खास कर जब किसी अपराध के लिए अधिकतम सजा 7 साल तय हो । इधक एक साल और 9 महीने तक भी आरोप  तय नहीं किये जा सके हैं।

  न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुंइया की पीठ ने कहा कि सौम्या चौरसिया एक साल और 9 महीने से भी अधिक समय से हिरासत में है उसके खिलाफ आरोप तय होना बाकी है और सुनवाई शुरू नहीं हुई है।

  • सेवा में बहाली पर शीर्ष कोर्ट ने लगाई रोक -

शीर्ष अदालत ने  छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक चौरसिया को सेवा में बहाल नहीं किया जाए साथ ही पीठ ने सौम्या चौरसिया को भी निर्देश दिया कि जब भी जरूरत हो वह अधीनस्त अदालत में पेश हों और गवाहों को प्रभावित न करें।  पीठ चौरसिया की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उच्च न्यायालय के 28 अगस्त के आदेश को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने चौरसिया को जमानत देने से इंकार कर दिया था। शीर्ष कोर्ट की पीठ ने कहा- चूंकि चौरसिया की याचिका में सुनवाई मेंं कुछ समय लगेगा इसलिये वह उसे अंतरिम जमानत दे रही है।

  • बड़ी साजिश का आरोप था जांच एजेंसी का

संघीय जांच एजेंसी ने 2022 में आरोप लगाया था कि कोयला लेवी घोटाले को अंजाम देने के लिए प्राकृतिक राज्यों से समृध्द राज्य में बड़ी साजिश रची गई थी। कोल परिवहन मामले में पिट पास के लिए ऑनलाइन आवेदन की जगह ऑफ लाइन आवेदन कर कोल परिवहन कर्ताओं से वसूली की जाती थी। प्रति टन 25 रुपये वसूले जाते थे । जो व्यापारी पैसे नहीं देता था उसे पिट पास जारी नहीं किया जाता था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे मामले का किंगपिन सूर्यकांत तिवारी था। उसे यह असीमित शक्ति सौम्या चौरसिया से ही मिलती थी। कथित तौर पर कहा जाता है कि चौरसिया के संरक्षण में दो साल के अंदर कुल 540 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। इस मामले मे ईडी ने सौम्या चौरसिया के अलावा समीर बिश्नोई, रानू साहू, सुनील अग्रवाल, हेमंत जायसवाल और अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था। इस मामले में दिसंबर 2022 से सौम्या चौरसिया जेल में है। 

ईडी ने किया जमानत का विरोध

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से अदालत में पेश अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने जमानत का विरोध किया और कहा कि सौम्या चौरसिया बहुत प्रभावशाली नौकरशाह हैं तथा उन्हें रिहा करने से मुकदमें पर असर पड़ेगा। चौरसिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिध्दार्थ दवे ने कहा मामले में सभी सहआरोपियों को जमानत मिल गई है और इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि मामले की सुनवाई कब शुरू होगी।