एसआई और एएसआई के 600 से ज्यादा पदों पर होगी भर्ती
● पुलिस भर्ती के लिए वैकेंसी इसी महीने ● इस बार व्यापमं से मंगाए जाएंगे आवेदन
बिलासपुर रायपुर। छत्तीसगढ़ में लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को हाईकोर्ट ने एक साल पहले 19 सिंतबंर को रद्द कर दिया था इस फैसले पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था अंततः शीर्ष कोर्ट ने एक मई को इस फैसले पर अंतरिम रोक का आदेश दे दिया। इससे छत्तीसगढ़ सरकार को राहत मिली है जिसके तहत उसे 2012 में जारी अधिसूचना के आधार पर भर्तियां करने की छूट मिल गई है।
इस तरह सुप्रीम कोर्ट से मिले अंतरिम राहत के आदेश के बाद एक बार फिर 58 फीसदी आरक्षण पुनः प्रभावी हो गया है। यानी अब शासन इसी आरक्षण प्रतिशत के आधार पर नौकरियों में नियुक्ति करेगा और परीक्षाओं के नतीजे भी अब इसी के अनुसार निकाले जाएंगे।
हाईकोर्ट ने जिस आरक्षण पर रोक लगाई थी वह पिछली सरकार के दौरान अधिसूचना जारी करके लागू किया गया था। इसके लिए लोकसेवा ( अजा, अजजा और पिछड़ा वर्ग आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा 4 में संशोधन किया गया था औऱ एसटी की 32 फीसदी, एससी को 12 फीसद और ओबीसी को 14 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
| सीएम ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई रुकी परीक्षाओं और भर्तियों की समीक्षा | सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में की थी अपील अब मिली राहत | 76 फीसदी आरक्षण का मामला अब तक अटका है राजभवन में |
| सीएम बघेल ने सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण मामले में दिए गए अंतरिम आदेश के बाद उच्च अधिकारियों की बैठक बुलाई। इस दौरान अधिकारियों को शासकीय पदों में भर्ती आदि के संबंध में तत्परता से आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश दिये। उन्होंने विभागों की भर्ती प्रक्रिया में भी तेजी से कार्रवाई करने कहा। सीएम ने बैठक के दौरान रुकी हुई भर्तियों और रुकी हुई भर्तियों की भी समीक्षा की। दरअसल सुप्रीम कोर्ट से मिले अंतरिम राहत के बाद शासकीय पदों में भर्ती के लिए रास्ता खुल गया है। इससे अब शासकीय विभागों द्वारा भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी इससे छत्तीसगढ़ में शीघ्र ही शासकीय पदों पर बड़े पैमाने पर भर्तियां की जा सकेंगी। सीएम ने कहा है कि सभी विभाग इसे गंभीरता से लेते हुए मिशन मोड में सभी भर्तियां पूरी हो यह सुनिश्चिच करें। | राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के तब के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले में एक मई सोमवार को सुप्रीमकोर्ट के जस्टिस बी.आर.गवई और जस्टिस सूर्यकांत की बैंच में सुनवाई हुई। इसके बाद सुप्रिम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी थी। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार को एसएलपी पर निर्णय आने तक 58 फीसदी आरक्षण रोस्टर से भर्तियां करने की छूट दी है। इस तरह 58 फीसदी में हिस्सेदारी 12 फीसदी एससी, 32 फीसदी एसटी और 14 प्रतिशत ओबीसी की होगी। | छत्तीसगढ़ सरकार ने 2 दिसंबर 2022 को विधानसभा में छत्तीसगढ़ लोक सेवा ( अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया था। इसके तहत अजजा के 32 फीसदी, अजा को 13 फीसदी, ओबीसी को 27 फीसदी अनारक्षित वर्ग के गरीबों को 4 फीसदी आरक्षणन देने का प्रावधान किया है। नए विधेयक के तहत कुल 76 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इधर राज्यपाल ने अब तक विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं और नहीं ही उसे लौटाया है। |
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