अब महाराष्ट्र-झारखंड में चुनावी सरगर्मियां तेज..
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पांचवा दिनः 176 बैग में से 140 का हिसाब किताब पूरा
नई दिल्ली / भुवनेश्वर । ओडिशा स्थित बोध डिस्टिलरी कंपनी पर आयकर छापे में रविवार 10 दिसंबर तक 351 करोड़ से अधिक नगदी जब्त की जा चुकी है। कांग्रेस सासंद धीरज साहू से जुड़े ठिकानों से बरामद नोटों की गिनती पांचवे दिन भी जारी रही। एसबाआई के क्षेत्रीय प्रबंधक भगत बोहरा ने रविवार 10 दिसंबर को बताया कि नोटों की गिनती में 3 बैंकों के अधिकारी लगे हैं। 40 नोट गिनने वाली मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नोटों के 176 बैगों में से रविवार तक 140 बैंगों में भरे हुए नोटों की गिनती और हिसाब-किताब कर लिया गया है बाकी की गिनती जारी है।
आयकर अधिकारियों ने बताया कि कंपनी के मुख्य प्रमोटर के बयान दर्ज करने के लिए समन जारी किए जाएंगे। विभाग का मानना है कि देशी शराब की नगद बिक्री से यह बेहिसाब धन जुटाया गया है। सांसद धीरज साहू के रांची समेत अन्य और ठिकानों पर भी छापे मारे गए थे। रविवार तक यह साफ नहीं हो पाया था कि कितनी नगदी और दस्तावेज बरामद किये गए हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद किसी भी सांसद के घर से इतनी बड़ी संख्या में नगदी जब्त नहीं हुई।
अब तक की सबसे अधिक नगदी जब्त विभागीय सूत्रों के अनुसार किसी एक समूह और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई के तहत देश में किसी एजेंसी द्वारा की गई यह अब तक की सबसे अधिक नगदी जब्ती है। इससे पहले इतनी भारी मात्रा में नगदी 2019 में बरामद की गई थी जब जीएसटी एंटेलिजेंस ने कानपुर के एक व्यवसायी से जुड़े व्यावसायिक परिसरों पर छापा मारा था और तब उस समय कुल 257 करोड़ रुपये नगद राशि बरामद की गई थी। वहीं जुलाई 2018 में तमिलनाडु में एक सड़क निर्माण फर्म के खिलाफ तलाशी के दौरान आयकर विभाग द्वारा 163 करोड़ रुपये नगदी बरामद करने का खुलासा किया गया था। |
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■ चीन 2046 में जी रहा है, इसकी तरक्की की रफ्तार देखते ही बनती हैं…..
हम एक धर्म निरपेक्ष देश हैं । हमारे निर्देश सभी के लिए होंगे। चाहे वे किसी धर्म या व्यवसाय के हों। अगर सड़क के बीच में कोई धार्मिक संरचना है फिर वह गुरूद्वारा हो, दरगाह या फिर मंदिर, तो उसे हटाना ही पड़ेगा। यह जनता के आवागमन में बाधा नहीं डाल सकती। साथ ही अवैध निर्माण तोड़ने से पहले पर्याप्त समय देना चाहिए। महिलाओं और बच्चों को सड़क पर देखना अच्छा नहीं । - जस्टिस बी.आर. गवई
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