(1) ट्रम्प को मारने की साजिश नाकाम, कान छूकर निकली गोली, एक की मौत, 12 घायल....
वाशिंगटन। अमेरिका के पेन्सिल्वेनिया में शनिवार शाम 6 बजकर 10 मिनट में (भारतीय समयानुसार रविवार तड़के 3 बजकरर 40 मिनय पर ) पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चुनावी सभा गोलियों की आवाज से गूंज उठी। ट्रम्प हमलावर के निशाने पर थे, गोली ट्रम्प के कान को छू कर निकल गई। भाषण देते हुए 78 साल के ट्रम्प ने अपने दाएं कान को हाथ लगाया और फौरन मंच पर ही झुक गए। ट्रम्प ने अपने समर्थकों की ओर देखा तो ...लोगों के यूएसए...यूएसए के नारों स जोश भर दिया। इसके बाद ट्रम्प सुरक्षाकर्मियों के साथ मंच पर उतरे।
हमलावर ने ट्रम्प पर गोली लगभग 120 मीटर की दूरी से चलाई थी। वह एक यार्ड की छत पर था। स्नाइपर ने बिना एक पल की देरी किए 20 साल के हलावार युवक थॉमस मैथ्यू को ढेर कर दिया। हमलावर की गोली से अपनी बेटी को बचाते हुए एक शख्श कोरी काम्परीरेटर की मौत हो गई। एफबीआई ने ट्रम्प पर हमले को हत्या की साजिश बताया है। इस पर अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अमरीका में इस प्रकार की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा- रैली के बीच में सेक्यूरिटी वालों ने जैसे ही पीछे खड़े कुछ लोगों को बिठाया , तभी गोलियां चलने लगीं। ट्रम्प की रैली में रिपब्लिकन पार्टी की समर्थक लीजा थॉमस ने बताया बीथल पार्क के पास की यार्ड की छत पर संदिग्ध युवक को देखा गया था। एक अन्य चश्मदीद एडम के अनुसार सेक्यूरिटी ने इस समय लोगों की तलाशी भी नहीं ली। ये भी सवाल उठ रहे हैं कि जब ट्रम्प भाषण दे रहे थे तभी सेक्युरिटी के कुछ लोग आए और ट्रम्प व हमलावर की बीच की पंक्ति के लोगों को संदिग्ध रूप से हटाने लगे। अमरीका में रैली के दौरान सेक्युरिटी वाले भाषण शुरू होने के बाद ऐसा नहीं करते। इसे अमरीका की सेक्युरिटी एसओपी माना जाता है।
(2) राजस्थान : अफसरों वाला गांव, 15 कलेक्टर, 3 आईएफएस, 500 से ज्यादा अफसर यहीं से.....
जयपुर। सुनन में हैरानी हो सकती है कि कोई गांव जो एक समय चोरी,डकैती जैसे अपराध में शामिल लोगों के गांव की तरह जाना जाता था अब वहां से अनेक तरह के अफसर निकल रहे हैं। यह गांव जो एक समय कुख्यात था अब पढ़े लिखे युवकों और अफसरों के कारण उसकी कीर्ति फैल रही है। 800 घरों के गांव में 500 से ज्यादा सरकारी अधिकारी, 15 आईएएस, 25 सिविल सर्वेंट हैं। चार दशक में इस गांव से अकेले 1600 सरकारी कर्मचारी बने। शिक्षा के प्रति ग्रामीणों के रुझान ने गांव की तस्वीर ही बदल कर रख दी। लोग शिक्षित हुए तो पशुबलि और मृत्युभोज भी बंद हो गए। गांव से निकले अफसरों से बात करने पर पता चला कि नया बास गांव क्यों चर्चित है। इसकी शुरूआत आखिर कैसे हुई की एक समय का कुख्यात गांव इस तरह अफसरों के गांव में तब्दील हो गया। 80-90 के दशक तक यह सवाल असहज करता था। चोरी -डकैती की घटनाओं में शामिल गांव के लोगों को तब लोगों के ताने ने एक तरह से जगाने का काम किया। और फिर शिक्षा से आई जागृति ने गांव के नाम पर लगा दाग घो दिया।
पहले की तस्वीर - पूरा गांव ही लगभग चोरी-डकैती और अवैध शराब के धंधे में था-
29 जून 1972 में नया बास में 5 हजार पुलिस कर्मी पहुंचे थे। उन्होंने गांव को चारों तरफ से घेर लिया था। ऑपरेशन का नेतृत्व तत्कालीन सीएम बरकतुल्ला खान व गृहमंत्री कमला बनीवाल कर रहे थे। स्थिति की गंभीरता इसी एक बात से समझी जा सकती है। यहां के इक्का -दुक्का परिवारों को छोड़ दें तो पूरा गांव ही चोरी-डकैती जैसे अपराधों में संलिप्त रहा करता था। एक बार एक जमींदार का ऊंच चोरी हुआ। चोर ने कहा ऊंट चाहिए तो रुपये दो। जमीदार पुलिस ले कर उसके घर पहुंचा लेकिन कहीं ऊंट नहीं मिला। मजबूरन जमीदार को चोर को रकम देनी पड़ी। चोर सबको उसी के घर की छत पर लेकर पहुंचा तो ऊंट का हाथ-पांव-मुंह कपड़े से बंधा था। यह बात यहां के रिटायर्ड आईएएस-के.एल. मीणा ने बताई।
- भौतिकी के ओलंपियाड में भारतीय छात्रों को दो स्वर्ण समेत 5 पदक- गणित के बाद भौतिकी में भी चमके, नोएडा की भव्या को रजत
नई दिल्ली। गणित के बाद भौतिकी के ओलंपियाड में भी भारतीय छात्रों ने उल्लेखनीय और सराहनीय प्रदर्शन किया है। ईरान के इस्फहान में आयोजित 54 वें अंतरराष्ट्रीय भौतिक ओलंपियाड (आईपीएचओ) में शामिल सभी पांच 5 भारतीय प्रतिभागियों ने पदक जीते। रायपुर के रिदम केडिया और इंदौर के वेद लाहोटी ने स्वर्ण पदक जीते। वहीं नागपुर के आकर्ष राज सहाय, नोएडा के भव्या तिवारी और कोटा के जयवीर सिंह ने रजत पदक जीता। 21 से 29 जुलाई तक चली प्रतियोगिता में 43 देशों के कुल 193 छात्रों ने भाग लिया । पदक तालिका में चीन शीर्ष पर रहा वहीं भारत ने वियतनाम के साथ संयुक्त रूप से चौथा स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में रूस और रोमानिया ने क्रमश- दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया। 2023 के ओलंपियाड में भारत ने ताईवान और रोमानिया के साथ संयुक्त रूप से पाँचवा स्थान प्राप्त किया था। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ के प्रो दीपक गर्ग और डॉ.शिरीष पठारे ने किया । प्रो ए.सी. बियानी व प्रो विवेक भिड़े वैज्ञानिक पर्यवेक्षक थे। इस बार कई पश्चिमी देश ओलंपियाड से दूर रहे।
- नीट -यूजी के लिए काउंसिलिंग 14 अगस्त से शुरू होगी।
नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक ( नीट-यूजी) 2024 के लिए काउंसिंलिंग 14 अगस्त से शुरू होगी। 29 जुलाई को जारी एमसीसी के नोटिस में यह जानकारी दी गई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग(एमसीसी) के सचिव डॉ बी. श्रीनिवास ने कहा कि काउंसिलिंग की प्रक्रिया के लिए पंजीकरण अगस्त के पहले सप्ताह में शुरू होने की संभावना है। अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के संबंध में ताजा जानकारी और नोटिस के लिए एमसीसी की वेबसाइट देखने की सलाह दी है।